यदि कुमार विश्वास कर सकते हैं तो सरकारें क्यों नहीं।

आज डॉक्टर KK Aggarwal जो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं, उनका कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण निधन हो गया। काफी दुख हुआ कि ऐसा व्यक्ति जो पूरे मनोयोग से समाज की सेवा कर रहा था, पूरे मेडिकल जगत में एक बहुत बड़ा नाम था, यूं चला जाएगा। आज उनका का एक वीडियो देख रहा था जिसमें वे कह रहे थे The show must go on. सही तो कहा उन्होंने, मनुष्य को जीवन के लिए संघर्ष करते रहना पड़ेगा। किरदार बदलते रहेंगे लेकिन The show must go on. 

विडंबना देखिए कितनी बड़ी-बड़ी हस्तियां कोरोना महामारी के द्वारा असमय काल कवलित हो गईं। जहां एक तरफ डॉक्टर KK Aggarwal जैसे लोग हैं जो स्वयं संक्रमित होने पर भी अंतिम समय तक समाज के लिए कार्य करते रहे, डॉक्टर कुमार विश्वास जैसे लोग हैं जो तन मन धन से निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जो संसाधनों के बावजूद लोगों को मरने के लिए छोड़ रहे हैं। 

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का tweet पढ़ रहा था, जिसमें उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा है कि आपको ग्राम स्तर पर कोविड केयर सेंटर की स्थापना करनी चाहिए। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जो काम कुमार विश्वास पिछले 1 महीने से कर रहे हैं वह काम केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अभी तक क्यों नहीं कर पायीं। ऐसे कौन से संसाधन हैं जो डॉक्टर कुमार विश्वास के पास तो हैं किंतु हमारे देश की सरकार तथा राज्य की सरकारों के पास नहीं है। यदि कोई काम डॉक्टर कुमार विश्वास घर बैठे केवल अपनी जान पहचान और अपनी लोकप्रियता के द्वारा लोगों से करवा पा रहे हैं और प्रशासन नहीं कर पा रहा है, तो इससे एक बात तो सिद्ध होती है कि असल में संसाधनों की कमी नहीं है। अगर कमी है तो दृढ़ इच्छाशक्ति की। सरकार भारी भरकम सरकारी तंत्र के साथ काम करना चाहती हैं और कर रही हैं किंतु सरकारी मशीनरी या तो मन से काम करना नहीं चाहती है या फिर उनके पास दूरदर्शिता की कमी है। कितना साधारण सा काम है, जो लोग ट्विटर पर डॉ कुमार विश्वास से मदद मांग रहे हैं उनको मदद उनके घर पहुंचाई जा रही है किंतु जो लोग सरकारी टोल फ्री नंबरों पर फोन करके मदद मांग रहे हैं उनको किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिल पा रही है।

आज आवश्यकता है कि सरकारें पहले तय करें कि उनकी प्राथमिकताएं क्या है। एक ऐसा सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया जाए कि कोई भी व्यक्ति यदि एक बार फोन करके मदद मांगता है तो उसकी उस मदद की गुहार को अनसुना न किया जाए बल्कि त्वरित कार्यवाही करते हुए उसको हर संभव सहायता पहुंचाई जाए। डॉ कुमार विश्वास ट्रस्ट के द्वारा, सोनू सूद के द्वारा, दीपेंद्र हुड्डा के द्वारा लोगों की मदद की जा सकती है वह भी घर बैठे हुए, तो क्या कारण है कि जिले की पूरी मशीनरी भी लोगों को मदद पहुंचाने में नाकाम रही है। लोग सीमित संसाधनों के द्वारा मदद कर रहे हैं, लोगों को घर तक दवाएं, मास्क, ऑक्सीजन तथा अन्य आवश्यक उपकरण मुहैया करा रहे किंतु राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली हो, उत्तर प्रदेश हो या अन्य कोई राज्य, आखिरकार इस प्रकार से लोगों की मदद क्यों नहीं कर पा रहे हैं जबकि उनके पास हर प्रकार के संसाधन मौजूद हैं।

आज हर न्यूज़ चैनल पर सत्ता दल या विपक्ष के लोग एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते दिख रहे हैं किंतु शायद ही उनमें से कुछ लोग जमीनी स्तर पर लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। जो काम डॉक्टर कुमार विश्वास तथा उनकी टीम के द्वारा किया जा सकता है या किया जा रहा है, वह काम जिले के विधायकों और सांसद द्वारा क्यों नहीं किया जा सकता। क्या यह उचित नहीं है कि वह अपने क्षेत्र में इस प्रकार के कोविड-19 मरीजों की मदद करें, आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लें ताकि कम से कम उनके क्षेत्र के लोगों को डॉ कुमार विश्वास पर निर्भर ना पड़े। जब वोट मांगने उनके घर जा सकते हैं तो कोविड-19 सेंटर्स की स्थापना करके ग्राम स्तर पर ही कोरोना महामारी को फैलने से बचाने का उपाय इन तथाकथित समाजसेवी द्वारा क्यों नहीं किया जा सकता?

जरूरत आत्मविश्वास, निष्ठा, लगन तथा सकारात्मक सोच की है। क्या विधायक और सांसदों के पास एक ऐसी निष्ठावान टीम मौजूद नहीं है? क्या उनके पास वह युवा नहीं है जो डॉक्टर कुमार विश्वास का साथ देने को तो तैयार हैं किंतु अपने क्षेत्र के सांसदों और विधायकों का साथ देने को तैयार नहीं। जहां तक सरकारी मशीनरी की बात है, अपने पास उपलब्ध सभी संसाधनों के बावजूद इस महामारी के दौरान भी लोगों की सहायता नहीं कर पा रहे हैं। लोग तड़प रहे हैं, इधर उधर भटक रहे हैं, मर रहे हैं किंतु बिल्कुल पास में बैठे सरकारी अधिकारियों, जिलाधिकारियों से वह सहायता नहीं मिल पा रही है जो उनको मिलनी चाहिए। वास्तविकता तो यह है की सरकारी तंत्र तथाकथित नियमों में इतना उलझा हुआ है या जानबूझकर उलझाया गया है कि चाह कर भी कई बार मजबूर हो जाता है। डॉ कुमार विश्वास ट्रस्ट हो या सोनू सूद, वह लोगों की मदद जिस प्रकार से भी हो सकती है, त्वरित मदद कर रहे हैं। इसके लिए अगर उन्हें दवाएं किसी दूसरी जगह से और महंगे दामों पर भी खरीदनी पड़ रही है तो खरीद रहे इसके लिए उन्हें किसी प्रस्ताव या अनुमोदन की जरूरत नहीं है। उनके साथ जो लोग लगे हुए हैं, वे ऐसे लोग हैं जो तन मन धन से बीमारों की सेवा करना चाहते हैं। कहीं न कहीं सरकारी तंत्र में संवेदनशीलता की कमी है। वो इस कठिन वक्त भी सामान्य दिनों की तरह अपनी ड्यूटी निपटा सी रहे हैं। जरूरत है कि सरकार आने वाले समय में इस प्रकार का ढांचा विकसित करे कि उपलब्ध संसाधनों के होते हुए भी लोगों को दर-दर भटकना न पड़े तथा पूरे विश्व में भारत की जग हंसाई न हो।

जय हिन्द।

Comments